Thursday, August 29, 2013

'अक्कड़-बक्कड़'

                     फ़ेसबुक पर उत्तराखंड सरकार के आपदा प्रबंधन में बरते गए नाकारेपन को दिखाती एक पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए मैंने लिख दिया था--"वो (कांग्रेसी) चैन से बीजेपी के साथ अक्कड़-बक्कड़ खेल रहे थे कि आपदा ने अचानक आकर खेल में खलल डाल दिया। उन्होने ऐसी कड़ी परीक्षा के लिए थोड़ी न सरकार बनाई थी...।"  मेरे छोटे बेटे ने अपनी पीढ़ी में 'अक्कड़-बक्कड़' न खेला न सुना, सो मुझसे पूछ लिया, "ये क्या खेल है पापा ?" उसे ज़ुबानी समझाया पर उसके हमउम्र, अपने युवा दोस्तों को भी मुझे जवाब देना ही चाहिए--
                    इस खेल में बच्चे एक गोला बनाकर खड़े होते हैं और एक बच्चा अपने बगल वालों पर क्रमश: उंगली रखता गाता है; अक्कड़-बक्कड़ बॉम्बे ब अस्सी नब्बे पूरे सौ, सौ में लगा ताला, चोर निकाल के भा--गा ! वो हर शब्द या अक्षर पर अपनी उंगली को अगले बच्चे पर रखता हुआ जिस पर गीत खत्म (भा-गा) करता है, उसे खेल से बाहर होना पड़ता है और वो बाहर बैठ कर खेल देखता हुआ, अपनी अगली बारी का इंतज़ार करता है।
      मेरा मतलब बहुमत का जुगाड़ बना कर चलती सरकार और रस्म अदायगी करता विपक्ष समय काट ही लेते। दुर्भाग्य से आपदा ने रविवार 16 जून '13 को अचानक आकर चौंका दिया...नई चुनौतियों का सामना वो क्या करते जो येन केन प्रकारेण कुर्सी हासिल किए बैठे हों और नौकरशाहों के साथ मिलकर पैसा बनाने में लगे हों !
        सुना है आपदा राशि को ठिकाने लगाने के हक़ पर मुख्य मंत्री और आपदा मंत्री के बीच मनमुटाव हो गया, कल विपक्षी इस पर लोकोक्तीय श्वेत-पत्र मांगें तो किसीको आश्चर्य नहीं होना चाहिए क्योंकि उनका तो हिस्सा तय नहीं किया गया ...अक्कड़-बक्कड़ बॉम्बे ब अस्सी नब्बे पूरे सौ, सौ में लगा ताला, चोर निकाल के भा--गा !

No comments:

Post a Comment